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जीएसटी बिल फ़ॉर्मेट: टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना चाहिए

जीएसटी बिल फ़ॉर्मेट: टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना चाहिए

जीएसटी और बिलिंग · 31 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट पढ़ें

इस लेख में
  1. जीएसटी बिल में क्या-क्या लिखा जाता है
  2. HSN कोड
  3. बिल नंबर का क्रम
  4. CGST+SGST या IGST: कौन सा लगेगा
  5. जीएसटी बिल का आसान उदाहरण
  6. टैक्स इनवॉइस और बिल ऑफ़ सप्लाई का फ़र्क़
  7. डिस्काउंट और कम डिलीवरी वाले बिल
  8. जीएसटी बिल की आम ग़लतियाँ
  9. MaalMitra कैसे मदद करता है
  10. आख़िरी बात

जीएसटी बिल यानी टैक्स इनवॉइस में आम तौर पर ये चीज़ें होती हैं: बेचने वाले का नाम, पता और GSTIN; हर वित्त वर्ष में क्रम से चलने वाला बिल नंबर और तारीख़; ख़रीदार का नाम, पता और GSTIN (अगर रजिस्टर्ड है); हर सामान का विवरण, HSN कोड, मात्रा और टैक्सेबल वैल्यू; टैक्स की दर और CGST+SGST या IGST की रकम; कुल रकम; और साइन। नियम समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए अपने कारोबार के लिए अपने CA से ज़रूर पूछें।

होलसेलर का बिल सिर्फ़ "कितना देना है" की पर्ची नहीं है। जीएसटी रजिस्टर्ड ख़रीदार उसी बिल के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेता है। बिल में ग़लती हुई तो उसका नुक़सान रिटेलर को भी होता है, और बहस आपसे होती है।

जीएसटी बिल में क्या-क्या लिखा जाता है

यह एक आम लिस्ट है, जो ज़्यादातर होलसेल और डिस्ट्रीब्यूशन बिलों पर लागू होती है:

हिस्सा क्या लिखें
बेचने वाला नाम, पता, GSTIN
बिल नंबर हर वित्त वर्ष में क्रम से चलने वाला, एक नंबर दोबारा नहीं
बिल की तारीख़ जिस दिन बिल बना
ख़रीदार नाम, पता, और GSTIN अगर रजिस्टर्ड है
प्लेस ऑफ़ सप्लाई राज्य का नाम, ख़ासकर दूसरे राज्य की बिक्री में
सामान विवरण, HSN कोड, मात्रा, यूनिट
रेट और रकम दाम, डिस्काउंट, और टैक्सेबल वैल्यू
टैक्स दर, और CGST+SGST या IGST की रकम अलग-अलग
कुल टैक्स सहित कुल रकम, शब्दों में भी अच्छा रहता है
रिवर्स चार्ज लागू है या नहीं
साइन बेचने वाले या उसके प्रतिनिधि का

HSN कोड

HSN कोड सामान की पहचान का नंबर है। बिल पर कितने अंक का HSN लिखना है, यह आपके टर्नओवर पर निर्भर करता है। अपने प्रोडक्ट के सही HSN अपने CA या सप्लायर के बिल से पक्के करें। विस्तार से हमारी गाइड HSN code on invoice (अंग्रेज़ी में) देखें।

बिल नंबर का क्रम

बिल नंबर हर वित्त वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में क्रम से चलते हैं और एक नंबर दो बिलों पर नहीं आता। बीच में नंबर छोड़ना या हाथ से बदलना बाद में सवाल खड़े करता है।

CGST+SGST या IGST: कौन सा लगेगा

  • एक ही राज्य में बिक्री: CGST और SGST, दोनों बराबर आधे-आधे।
  • दूसरे राज्य में बिक्री: पूरा IGST।

यह बेचने वाले के राज्य और प्लेस ऑफ़ सप्लाई से तय होता है। आसान भाषा में फ़र्क़ के लिए पढ़ें CGST SGST IGST difference (अंग्रेज़ी में)।

जीएसटी बिल का आसान उदाहरण

मान लीजिए किसी सामान का टैक्स सहित दाम ₹1,180 है, और उदाहरण के लिए उस पर 18% जीएसटी लगता है। (असली दर आपके सामान पर निर्भर है; 2025 में कई दरें बदली भी हैं।)

टैक्सेबल वैल्यू = दाम × 100 ÷ (100 + दर)

₹1,180 × 100 ÷ 118 = ₹1,000 टैक्सेबल वैल्यू, और ₹180 टैक्स।

एक ही राज्य दूसरा राज्य
टैक्सेबल वैल्यू ₹1,000 ₹1,000
CGST (9%) ₹90 —
SGST (9%) ₹90 —
IGST (18%) — ₹180
कुल ₹1,180 ₹1,180

कुल रकम वही है, बस टैक्स का बँटवारा अलग। टैक्स सहित दाम से बिल बनाने की पूरी बात हमारी गाइड GST inclusive price invoice (अंग्रेज़ी में) में है।

टैक्स इनवॉइस और बिल ऑफ़ सप्लाई का फ़र्क़

टैक्स इनवॉइस बिल ऑफ़ सप्लाई
कौन देता है सामान्य जीएसटी रजिस्टर्ड विक्रेता कंपोज़िशन स्कीम वाला विक्रेता, या टैक्स-फ़्री सामान बेचने वाला
जीएसटी ले सकते हैं हाँ नहीं
ख़रीदार को इनपुट क्रेडिट आम तौर पर हाँ नहीं

कई छोटे किराना दुकानदार कंपोज़िशन स्कीम में होते हैं। वे ग्राहक से जीएसटी नहीं ले सकते और टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ़ सप्लाई देते हैं।

डिस्काउंट और कम डिलीवरी वाले बिल

होलसेल में दो स्थितियाँ बार-बार आती हैं:

  • बिल पर डिस्काउंट। अगर डिस्काउंट बिल पर ही दिया गया है, तो आम तौर पर टैक्स डिस्काउंट घटाने के बाद वाली रकम पर लगता है। जैसे ₹1,000 के सामान पर ₹50 छूट हो, तो टैक्सेबल वैल्यू ₹950 होगी। बाद में दी गई स्कीम या क्रेडिट नोट के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए उनके लिए अपने CA से पूछें।
  • कम माल पहुँचा। ऑर्डर 10 कार्टन का था और 8 पहुँचे, तो बिल 8 का ही बनना चाहिए। अगर बिल पहले बन गया हो, तो फ़र्क़ को सही तरीक़े से (जैसे क्रेडिट नोट से) ठीक करें, बिल को हाथ से न काटें।

इन दोनों मामलों में साफ़ रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है, क्योंकि रिटेलर का खाता और आपका टैक्स, दोनों इसी पर टिके हैं।

जीएसटी बिल की आम ग़लतियाँ

  • ख़रीदार का GSTIN ग़लत या छूटा। रिटेलर का इनपुट क्रेडिट अटक सकता है।
  • टैक्स सहित दाम पर फिर से टैक्स। दाम में पहले से टैक्स है तो ऊपर से न जोड़ें; ऊपर वाले फ़ॉर्मूले से टैक्सेबल वैल्यू निकालें।
  • दूसरे राज्य की बिक्री पर CGST+SGST। वहाँ IGST लगता है।
  • बिल नंबर दोबारा या टूटा क्रम।
  • कम डिलीवरी का पूरा बिल। जितना माल पहुँचा, बिल उतने का ही होना चाहिए।
  • पुराने रेट पर बिल। दरें बदलें तो अपने प्रोडक्ट की दरें अपडेट करें।

MaalMitra कैसे मदद करता है

MaalMitra होलसेलर के लिए ऑर्डर से ही जीएसटी टैक्स इनवॉइस बनाता है, ताकि बिल हाथ से न लिखना पड़े:

  • डिलीवरी पर इनवॉइस। ऑर्डर डिलीवर होने पर टैक्स इनवॉइस बनता है, उतने ही माल का जितना असल में डिलीवर हुआ।
  • वित्त वर्ष के हिसाब से नंबर। हर होलसेलर के बिल नंबर हर वित्त वर्ष में अलग क्रम में चलते हैं।
  • HSN और सही टैक्स। प्रोडक्ट के HSN बिल पर आते हैं, और GSTIN के राज्य के हिसाब से CGST+SGST या IGST लगता है।
  • प्रिंट या PDF। बिल प्रिंट करें या PDF बनाकर रिटेलर को दें।
  • CSV से प्रोडक्ट। प्रोडक्ट और HSN CSV से एक साथ डालें या अपडेट करें।
  • इंस्टेंट सेल। काउंटर पर आए दुकानदार के लिए डिलीवरी, पेमेंट और जीएसटी इनवॉइस एक ही क़दम में।

ध्यान दें: MaalMitra जीएसटी रिटर्न फ़ाइल नहीं करता, और ई-इनवॉइस या ई-वे बिल नहीं बनाता। इनके लिए अपने CA या सही पोर्टल का इस्तेमाल करें।

आख़िरी बात

अच्छा जीएसटी बिल साफ़, पूरा और सही होता है: सही GSTIN, क्रम वाला नंबर, सही HSN, सही टैक्स का बँटवारा, और उतने ही माल का बिल जितना पहुँचा। इससे रिटेलर का भरोसा भी बढ़ता है और आपका हिसाब भी साफ़ रहता है। अपने कारोबार के नियमों के लिए अपने CA से ज़रूर सलाह लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जीएसटी बिल में कौन सी जानकारी ज़रूरी होती है?

आम तौर पर बेचने वाले का नाम, पता और GSTIN; बिल नंबर और तारीख़; ख़रीदार का नाम, पता और GSTIN (अगर रजिस्टर्ड है); सामान का विवरण, HSN, मात्रा, टैक्सेबल वैल्यू, टैक्स की दर और CGST-SGST या IGST की रकम, रिवर्स चार्ज लागू है या नहीं, और साइन। अपनी स्थिति के लिए अपने CA से ज़रूर पूछें।

कंपोज़िशन स्कीम वाला दुकानदार जीएसटी बिल दे सकता है?

नहीं। कंपोज़िशन स्कीम वाले टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ़ सप्लाई देते हैं और ग्राहक से जीएसटी नहीं ले सकते।

टैक्स सहित दाम से टैक्सेबल वैल्यू कैसे निकालें?

टैक्सेबल वैल्यू = दाम × 100 ÷ (100 + टैक्स दर)। उदाहरण के लिए, 18% दर पर ₹1,180 के दाम में टैक्सेबल वैल्यू ₹1,000 और टैक्स ₹180 है।

क्या MaalMitra जीएसटी बिल बनाता है?

हाँ, होलसेलर के लिए। डिलीवरी पर ऑर्डर का जीएसटी टैक्स इनवॉइस बनता है, हर होलसेलर का हर वित्त वर्ष में अलग नंबर क्रम, HSN, और GSTIN के राज्य के हिसाब से CGST+SGST या IGST के साथ; इसे प्रिंट या PDF किया जा सकता है। MaalMitra रिटर्न फ़ाइल नहीं करता।

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